मंगलवार, 16 अगस्त 2016

जब फूट-फूट कर रोए सोनू निगम

भिखारी के भेष मैं सोनू निगम

सोनू निगम एक ईमानदार और सरल हृदय वाला व्यक्तित्व है. वह जहां दूसरों के दर्द को समझते हैं वहीं, लोगों की मदद करने में भी पीछे नहीं रहते हैं. यही नहीं, युवाओं के लिए सोनू निगम एक स्टाइल आईकॉन भी हैं और अपने फैंस को हमेशा अपने न्यू लुक और हेयरस्टाइल से चौंकाते रहते हैं.

ट्रांसजेंडर म्यूजिक ग्रुप लॉन करने वाले पहले सिंगर

सोनू निगम ने वाई फिल्म्स ट्रांसजेंडर म्यूजिक ग्रुप ‘6 पैक बैंड’ को लॉन्च किया है, जिसमें बैंड के एक सॉन्ग को सोनू ने अपनी आवाज भी दी है. इस एलबम में 6 गाने हैं, जो भारत की अलग-अलग कम्यूनिटी के 6 ट्रांसजेंडर्स ने गाए हैं. इनमें सोनू निगम और अनुष्का शर्मा ने मिलकर अपनी आवाज दी है.

सोनू निगम ने दर्द में गाया था ‘सरबजीत’ का दर्द

सोनू निगम के द्वारा गाया फिल्म ‘सरबजीत’ का गाना ‘दर्द..’ एक ऐसे समय में रिकॉर्ड किया, जब वह मुश्किल से चल पा रहे थे. दरअसल, उन्होंने इस सॉन्ग की रिकॉर्डिंग से 10 दिन पहले ही अपने घुटने की सर्जरी कराई थी. उनके मुताबिक ये खूबसूरत गीत ‘दर्द’ एक दर्द भरे व्यक्ति ने ही गाया था.

भिखारी के भेष में फैंस को किया हैरान

हाल ही में सोनू निगम ने अपने फैंस को तब हैरान कर दिया, जब वह मुंबई की सड़कों पर लगातार तीन घंटे तक भिखारी के भेष में गाना गाते रहे और उन्हें कोई पहचान ही न सका. इस दौरान एक लड़के ने कुछ पैसे उनके हाथ में थमाए और उनसे खाना खाने को कहा. सोनू के मुताबिक ‘‘ये अनुभव बेहद अभिभूत कर देने वाला था. इससे मुझे काफी कुछ हासिल हुआ और लगा कि जिंदगी की सबसे बड़ी सौगात मिल गई हो.’’

सामाजिक कार्यों में रहते हैं सक्रिय

गायक सोनू निगम सोशल वर्क में भी काफी एक्टिव रहते हैं और अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हैं. वह कई संगठनों से जुड़े हैं, जिनमें कैंसर रोगियों, कुष्ठ रोगियों और नेत्रहीनों के लिए चलाई जाने वाली संस्था प्रमुख है. इसके अलावा सोनू निगम ने कारगिल युद्ध भूकंप पीड़ितों व बच्चों के लिए चलाई जाने वाली संस्था ‘क्रेयॉन’ के लिए भी योगदान दिया और इस संस्था के एक बच्चे को वह स्पॉन्सर भी कर रहे हैं.

जब दूसरे गायकों से गवाए सोनू के गाने

एक इंटरव्यू के दौरान सोनू निगम ने कहा था ‘‘मैं अपने पिता का सपना हूं और जो भी पैसा मैं कमाता हूं वह अपने पिता को देता हूं.वह इसे सही जगह इन्वेस्ट करते हैं और मेरे जीवन को सुरक्षित रखते हैं. वह कहते हैं कि मैं जब चाहूं अपने काम रोक सकता हूं.’’ सोनू बताते हैं कि एक बार जब मैंने अपने संघर्ष के दिनों में टी-सिरीज के स्टूडियो में दो गाने गाए, उनसे मुझे बड़ी उम्मीद थी, लेकिन जब एक महीने बाद मैं उनके ऑफिस गया तो, मुझे मालूम चला कि ये गाने एस.पी.बालासुब्रहमणयम और मनुचित्रा को दे दिए गए हैं तो, मैं टी-सिरीज के ऑफिस से निकल कर फूट फूटकर रोने लगा. मैं पहले ही बहुत हताश था. थक गया था मैं धक्के खा-खाकर, लोगों की गालियां सुन-सुनकर और उन दिनों में मेल सिंगर्स को सबसे ज्यादा स्ट्रगल करना पड़ता था.

जिंदगी में मेरे कई अफेयर रहे सोनू निगम के

सोनू निगम के मुताबिक मैं अपनी जिंदगी में कई अफेयर और रिलेशनशिप में रहा हूं. जब मेरे पिता मुझे अपने साथ किसी टूर पर और किसी कॉन्सर्ट में ले जाते थे तो, वहां कुछ लड़कियों से मैं जरूर मिलता था. हर जगह पर एक लड़की हुआ करती थी. हालांकि सोनू निगम ने वर्ष 2002 में अपने गर्लफ्रेंड मधुरिमा बेनर्जी से शादी कर ली. उनका एक बेटा निवान है. निवान को भी सोनू की ही तरह गायकी का शौक है. धनुष के गाए गीत ‘व्हाई दिस कोलावरी डी..’ के लिटिल वर्जन को गाने के बाद निवान को खूब पसंद किया गया.

सोनू निगम गाने वाले थे ‘एक लड़की को देखा तो..’

‘1942 ए लव स्टोरी’ के मशहूर गीत ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा..’ को पहले सोनू निगम ही गाने वाले थे. दरअसल, इस गाने की रिकॉर्डिंग करने के लिए कुमार शानू पहुंचने में कुछ मिनट लेट हो गए और फिल्म निर्माता ने आर.डी.बर्मन को ये गीत सोनू निगम को ऑफर करने को कहा, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था सोनू निगम के लिए. अंतत: ये गीत कुमार शानू की आवाज में ही रिकॉर्ड किया गया.

...डिम्पल सिरोही...

बारह भाषाओं के मंजे हुए गायक हैं सोनू निगम

संगीतकार खैयाम के साथ गायक सोनू निगम

नाम- सोनू निगम
जन्मतिथि- 30 जुलाई 1973
पिता- अगम कुमार निगम
माता- शोभा निगम
बहनें- मीनल और निकिता
पत्नी का नाम- मधुरिमा
बेटा- निवान निगम

सोनू निगम का जन्म 30 जुलाई 1973 को भारत में हरियाणा के फरीदाबाद में एक कायस्थ परिवार में हुआ. वह हिंदी फिल्मों के फेमस सिंगर हैं और हिंदी के साथ-साथ कन्नड़, उड़िया, तमिल असमिया, पंजाबी मराठी और तेलुगु फिल्मों में भी अनेक गाने गा चुके हैं. वह प्लेबैक सिंगर हैं और कई इंडी-पॉप एलबम भी उन्होंने बनाए हैं. यही नहीं सोनू निगम एक अच्छे एक्टर हैं और उन्होंने कुछ हिंदी फिल्मों में भी काम किया है.
सोनू निगम चार साल की उम्र से संगीत की दुनिया में हैं. उन्होंने सबसे पहले अपने पिता के साथ मंच साझा किया था और मोहम्मद रफी का गीत ‘क्या हुआ तेरा वादा..’ गाया. फिर वह शादियों और पार्टीज में भी अपने पिता के साथ जाते और गायकी करने लगे. कुछ बड़े होने पर उन्होंने कई बड़ी संगीत प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया. पंद्रह वर्ष के होने पर गायकी को ही अपना व्यवसाय बनाने के लिए वह अपने पिताजी के साथ मुंबई आ गए और शास्त्रीय गायक उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली.
प्लेबैक सिंगिंग
गायकी के करियर के शुरुआती दौर में सोनू निगम को काफी संघर्ष करना पड़ा, तब उन्होंने टी- सिरीज की एक एलबम ‘रफी की यादों’ के लिए गाना शुरू किया. टी-सिरीज के मालिक गुलशन कुमार ने उन्हें ज्यादा लोगों तक पहुंचने का मौका दिया और पार्श्व गायक के रूप में सोनू निगम ने अपना पहला गीत 1990 में आई फिल्म ‘जनम’ के लिए गाया, जो औपचारिक तौर पर रिलीज ही नहीं हुआ. इसके बाद उन्होंने रेडियो पर विज्ञापन बनाना शुरू किया और साथ साथ 1995 में जी टीवी पर प्रसारित होने वाले फेमस कार्यक्रम सारेगामापा का संचालन करना शुरू किया. उनका पहली बार रिलीज होने वाला गाना फिल्म ‘आजा मेरी जान’ का ‘ओ आसमान वाले..’ है, तब उन्होंने अपना पहला एलबम ‘रफी की यादें’ 1992 में रिलीज किया.
कुछ दिनों बाद ये एलबम इतना पापुलर हुआ कि सोनू को फिल्म ‘बेवफा’ में गाने का मौका मिला. इस फिल्म में उन्होंने ‘अच्छा सिला दिया..’ गाया. ये गाना ठीक ही रहा, लेकिन 1997 में आई फिल्म ‘बॉर्डर’ के गीत ‘संदेसे आते हैं..’ ने उन्हें बड़ी सफलता दिलाई. फिल्म ‘परदेस’ का सोनू निगम की आवाज में गाना ‘ये दिल..’ भी काफी पसंद किया गया.
1999 में उनका एलबम ‘दीवाना’ आया, जिसमें उन्होंने लव सांग्स के जरिए अपना टेलेंट दिखाया और ये एलबम आज भी भारत के सफलतम एलबम में से एक है. फिल्म ‘परदेस’ के गीत ‘ये दिल दीवाना..’ गाने के बाद बॉलीवुड में उनकी पहचान बनीं, उन्होंने कई पुरस्कार भी जीते और उन्हें फिल्म ‘कल हो न हो’ का टाइटल सॉन्ग गाने का ऑफर मिला, साथ ही 2013 में फिल्म ‘अग्निपथ’ का गीत ‘अभी मुझमें कहीं..’ भी मोस्ट पापुलर सॉन्ग साबित हुआ. उन्होंने फिल्म ‘सूपर से ऊपर’ और ‘जाल’ के गीतों को बिक्रम घोष के साथ मिलकर कंपोज किया. बाद में सोनू ने एक पंजाबी सिंगल रिलीज किया, जिसका शीर्षक ‘पंजाबी प्लीज’ था और रफी का टू डिस्क कलेक्शन रिलीज किया, जिसमें बर्मिंघम सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा ने संगीत दिया. अपने एलबम ‘चंदा की डोली’ के लिए सोनू ने कई गीत लिखे और सभी गीतों को अपनी आवाज दी. माइकल जैक्सन की मृत्यु के बाद सोनू ने उन्हें श्रृद्धांजलि के तौर पर एक एलबम ‘द बीट ऑफ अवर हर्ट्स’ रिलीज किया.
नवंबर 2007 में सोनू निगम को हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी में ड्रयू गिलपिन फॉस्ट के 28वें प्रेसीडेंट चुने जाने पर हॉर्वर्ड कॉलेज संगीत के दौरान गांधी जी का प्रिय भजन ‘वैष्णव जन तो तेने रे कहिए..’ गाने का मौका मिला. 2008 में उन्होंने यूनाइटेड किंगडम के ‘थ्री सिटी टूर’ में पार्टिशिपेट किया, जिसमें उन्होंने मोहम्मद रफी के गीत गाए.
वर्ष 2011 में सोनू निगम ने ब्रिटनी स्पियर्स के साथ ‘आई वाना गो..’ का रिमिक्स गाया और डीजे अविशी के साथ गाना ‘इंडियन लेवल’ गाया.
वर्ष 2013 में 7 सितंबर से 5 अक्टूबर तक सोनू निगम यूएस बिलबोर्ड के चार्टस के नंबर वन आर्टिस्ट बने.
सितंबर 2015 में निगम ने मशहूर संगीतकार खय्याम के साथ मिलकर एक गाना रिकॉर्ड किया, जिसका शीर्षक ‘गुलाम बंधु’ था.
एक्टिंग करियर
सोनू ने फिल्म ‘बेताब’ से अपना फिल्मी करियर शुरू किया था.  इसके बाद उन्होंने ‘उस्तादी उस्ताद से’ ‘हमसे है जमाना’ ‘तकदीर’ ‘कृष्णा-कृष्णा’ ‘प्यारा दुश्मन’ ‘जानी दुश्मन-एक अनोखी कहानी’ ‘काश आप हमारे होते’ और ‘लव इन नेपाल’ जैसी फिल्मों में काम किया. इसके अलावा सोनू निगम ने एक एनिमेटिड फिल्म ‘डिज्नीज अलादीन’ के हिंदी संस्करण को अपनी आवाज में डब किया है और गायकी भी की है.
सिंगिंग और कंपोजिंग
सोनू निगम ने कई भाषाओं में रॉक, रोमांटिक, सैड और देशभक्ति सभी प्रकार के गाने गाए हैं. उन्होंने फिल्म ‘सिंह साहब द ग्रेट’ का टाइटल सॉन्ग कंपोज किया तथा फिल्म ‘जाल’ के सभी सॉन्गस कंपोज किए.
सोनू ने 1999 में जी टीवी पर प्रसारित होने वाला शो ‘सा रे गा मा पा’ को होस्ट किया था. अक्टूबर 2007 में वह ‘सा रे गा मा पा लिटिल चैंप्स’ इंटरनेशनल में सुरेश वाडकर के साथ जज की भूमिका में आए. इसके बाद निगम 2009 में ‘सा रे गा मा पा मेगा चैलेंज ग्रांड फिनाले’ में सेलिब्रिटी जज की भूमिका में दिखाई दिए.
 पुरस्कार और सम्मान
‘बॉर्डर’ फिल्म के गीत ‘संदेसे आते हैं..’ के लिए वर्ष 1997 में बेस्ट प्लेबैक सिंगर मेल का जी सिने अवॉर्ड तथा बेस्ट मेल सिंगर का ‘आशीर्वाद अवॉर्ड’ तथा बेस्ट मेल सिंगर ‘सनसुई व्यूवर्स च्वायस अवॉर्ड’ दिया गया.
वर्ष 2001 में बेस्ट मेल पॉप आर्टिस्ट का ‘स्टार स्क्रीन अवॉर्ड’, फिल्म ‘कभी खुशी कभी गम’ के गीत ‘सूरज हुआ मद्धम..’ के लिए बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर चुने गए. इसी वर्ष इसी गीत के लिए आईफा अवॉर्ड तथा बेस्ट प्लेबैक का जी सिने अवॉर्ड भी दिया गया.
इसी वर्ष उन्होंने अपने एलबम याद के लिए बेस्ट पॉप सिंगर का बॉलीवुड म्यूजिक अवॉर्ड भी प्राप्त किया,  फिल्म ‘दिल चाहता है’ के गाने ‘तन्हाई..’ के लिए बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का स्टार स्क्रीन अवॉर्ड.
वर्ष 2002 में फिल्म साथिया के गाने साथिया के लिए बेस्ट मेल प्लेबैक का आईफा अवॉर्ड, तथा वर्ष 2002 का ‘जी सिने अवॉर्ड’ फोर बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर, एमटीवी इम्मीज का बेस्ट मेल सिंगर अवॉर्ड तथा इसी गीत के लिए बॉलीवुड म्यूजिक अवॉर्ड फोर बेस्ट मेल सिंगर, बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का ‘फिल्मफेयर अवॉर्ड’.
फिल्म ‘कल हो न हो’ के गाने ‘कल हो न..’ हो के लिए बेस्ट प्लेबैक मेल का फिल्मफेयर, आईफा अवॉर्ड, तथा नेशनल फिल्म अवॉर्ड से भी सम्मानित किए गए.
2005 में एमटीवी द्वारा स्टाइल आईकॉन के लिए ‘एमटीवी स्टाइल अवॉर्ड’ दिया गया तथा ‘टीचर्स अचीवमेंट अवॉर्ड’ भी दिया गया.
2005 में फिल्म ‘पहेली’ के गाने ‘धीरे जलना..’ के लिए बेस्ट मेल सिंगर का ‘स्टार स्क्रीन अवॉर्ड’ मिला इसी वर्ष फिल्म ‘कल हो न’ हो के गाने ‘मै हूं न..’  के लिए ‘लॉयन गोल्ड्स अवॉर्ड’, तथा संगीत में आउटस्टेंडिंग परफॉर्मेंस के लिए ‘स्वरालय येसुदास अवॉर्ड’ प्रदान किया गया.
वर्ष 2006 में टाइटल ट्रैक ‘कभी अलविदा न कहना..’ के लिए बेस्ट मेल सिंगर का बॉलीवुड म्यूजिक व फैशन अवॉर्ड’ मिला.
2007 में फिल्म ‘ओम शांति ओम’ के गाने ‘मैं अगर कहूं..’ के लिए वार्षिक सेंट्रल यूरोपियन बॉलीवुड म्यूजिक अवॉर्ड फोर प्लेबैक सिंगर.
2008 में फिल्म ‘जोधा अकबर’ के ‘इन लम्हों के दामन में..’ गाने के लिए ‘लॉयन्स गोल्ड अवॉर्ड’, तथा बेस्ट मेल सिंगर का ‘एनुअल सेंट्रल यूरोपियन बॉलीवुड अवॉर्ड’
वर्ष2009 में टाइटल ट्रेक ‘दिल मिल गए..’ के लिए बेस्ट मेल सिंगर का ‘टेलिविजन एकेडमी अवॉर्ड’ तथा इसी वर्ष कन्नड़ का ‘फिल्मफेयर फोर बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर’.
2010 में ‘ग्लोबल इंडिया म्यूजिक अवॉर्ड’ फोर बेस्ट लाइव परफॉर्मर मेल.
वर्ष 2011 में एमटीवी यूथ आईकॉन का ‘ग्लोबल इंडियन म्यूजिक अवॉर्ड’.
2012  में फेवरेट एवरग्रीन सिंगर का ‘लॉयन्स गोल्ड अवॉर्ड’.
2013 में ‘अग्निपथ’ के गीत अभी मुझमें कहीं के लिए बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का ‘रॉयल स्टेग मिर्ची म्यूजिक अवॉर्ड’, साथ ही ‘जी सिने अवॉर्ड’ और ‘लॉयन्स गोल्ड अवॉर्ड’ व ‘एमटीवी वीडियो एंड म्यूजिक अवॉर्ड’ भी दिया गया.
...डिम्पल सिरोही...


विवादों से भी जुड़ा रहा सोनू निगम का नाम

.....डिम्पल सिरोही.....

सोनू निगम एक उम्दा पर्सनेलिटी तो हैं ही साथ ही वह बॉलीवुड की एक मशहूर आवाज भी हैं, लेकिन जिंदगी में कामयाबी और आलोचनाएं भी साथ-साथ चलती हैं. सिंगर सोनू निगम के साथ भी ऐसा ही है. उनका विवादों से उस समय नाता जुड़ा जब 2015 में उन्होंने राधे मां के मिनी स्कर्ट में फोटो के वायरल होने पर हुए विवाद के दौरान राधे मां की तुलना काली मां से कर डाली. राधे मां के समर्थन में सोनू निगम ने ट्वीट करते हुए लिखा था, ‘काली मां को तो राधे मां से कम कपड़ों में दिखाया गया है और ये इंटरेस्टिंग है कि कम कपड़ों के कारण एक महिला पर ये देश मुकदमा चलाना चाहता है.’ इसी तरह उन्होंने कहा कि मुकादमा चलाना ही चाहते हैं, तो उनके अनुयायियों पर चलाइए… खुद पर मुकदमा चलाइए. महिलाओं व पुरुषों को धर्मगुरू बनाने के लिए दोनों के लिए अलग-अलग कानून, ये ठीक नहीं है.
वरिष्ठ पत्रकार पर लगाया यौन शोषण का आरोप
सोनू निगम ने वर्ष 2007 में एक वरिष्ठ पत्रकार पर यौन शोषण का आरोप लगाकर सनसनी फैला दी थी. मशहूर एंटरटेनमेंट सीनियर जर्नलिस्ट सुभाष के. झा पर आरोप लगाया था कि ‘जब मैंने उनकी मांगे नहीं मानी, तो उन्होंने अपने होमोसेक्सुअल डिजायर के लिए मेरा शोषण करना शुरू कर दिया. उन्होंने आरोप लगाए थे कि जर्नलिस्ट उन्हें अश्लील मैसेज भेजता और फोन पर अश्लील बाते करता.
झगड़े के कारण म्यूजिक चैनल ने किया बैन
एक एंटरटेनमेंट चैनल के मालिक सुभाष चंद्रा गोयल से झगड़े और विवाद की वजह से सोनू निगम के दो गानों को फिल्म से बाहर निकाल दिया गया था. दरअसल, अमर सिंह की पार्टी के दौरान सुभाष चंद्रा गोयल व सोनू निगम के बीच झगड़ा हो गया था और सुभाष काफी गुस्से में आ गए, जिस कारण सोनू निगम के गानों का बहिष्कार कर दिया. फिल्म ‘इश्क फॉरएवर’ के लिए सोनू निगम ने दो गाने गाए थे, लेकिन इसका म्यूजिक राइट सुभाष गोयल के पास होने के कारण फिल्म के दोनों गाने निकालकर जावेद अली की आवाज में रिकॉर्ड कराए गए.
विमान यात्रा के दौरान गायकी कर तोड़ा कानून
हाल ही में सोनू निगम के जेट एयरवेज में एक सफर के दौरान विमान के यात्रियों को मनोरंजन करने के लिए विमान की सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली का उपयोग किया था, जिसके कारण उन्हें काफी आलोचनाएं झेलनी पड़ी थी. उन्हें ऐसा करने की अनुमति देने के लिए विमान के क्रू को निलंबित कर दिया गया था. सोनू निगम ने इसे असल असहिष्णुता बताया था.
सलमान के साथ अनबन की भी आई खबरें
खबर यह भी आई थी एक रात टी-सिरीज के संस्थापक गुलशन कुमार की याद में हुए एक संगीत कार्यक्रम में सोनू और सलमान के बीच भी कुछ कहासुनी हो गई थी, लेकिन सोनू निगम ने सलमान खान के साथ हुई इस अनबन को दरकिनार करते हुए इस मामले को एक अफवाह बताया था.


झूमने पर मजबूर कर देंगे ये देशभक्ति गीत

AddThis Sharing Buttons





देश की आजादी के जश्न का मौका हो और देशभक्ति के गाने न गाए जाएं ये हो ही नहीं सकता, लेकिन कुछ गाने जब भी सुना जाए, तो बड़ी ही आसान भाषा और संगीत के जरिए देश के प्रति कुछ कर गुजरने का एक जज्बा और जुनून जगा जाते हैं. ऐसे कुछ गाने ये भी हैं.

जिंदगी मौत ना बन जाए संभालो यारों…  
सोनू निगम की आवाज में फिल्म सरफरोश का ये गाना लोगों के दिल के बहुत करीब है. इस गाने को आमिर खान पर फिल्माया गया था, जो आतंकवादियों से टक्कर लेते हैं.
रंग दे बसंती टाईटल सॉन्ग… 
दलेर मेहंदी की नीची से ऊंची होती आवाज में जब कोई इस गाने को सुनता है. खुद ब खुद पांव थिरकने लगते हैं. यकीं नहीं होता तो जरा सुनकर देखिए. ये गाना फिल्म शहीद को ये एनर्जेटिक सॉन्ग एक क्लासिक सॉन्ग है, जो देशभक्ति से जुड़े हर समारोह में बजाया जाता है. आपको बताते चलें कि इस गीत को मशहूर संगीतकार ए आर रहमान ने संगीत दिया है.
भारत हमको जान से प्यारा है…
फिल्म ‘रोजा’ का ये गीत भी हर किसी को देशभक्ति के रस में डुबो देता है. ये फिल्म हालांकि कश्मीर मुद्दे को प्रदर्शित करती है. फिल्म में दक्षिण भारत का एक कपल कश्मीर में हनीमून के लिए जाता है. जिसे जेहादियों द्वारा किडनैप कर लिया जाता है, लेकिन इस सॉन्ग को सुनकर वाकई देश के लिए मर मिटने का जज्बा पैदा होता है.
ऐसा देश है मेरा…. 
‘वीर जारा’ भारत पाकिस्तान के क्रॉस बॉर्डर रिश्ते पर बेस्ड ये एक रोमांटिक फिल्म थी, जिसमें एक भारतीय लड़की और लड़के को एक दूसरे से प्यार हो जाता है और इस गाने में भी दोनों एक दूसरे को अपने-अपने देशों को एक सकारात्मक धरातल पर परिचित करा रहे हैं, जब भी ये गीत कानों में पड़ता है दिल एक बच्चे की तरह झूमने लगता है.
देश मेरा रंगीला….
ये पैपी पैट्रियाटिक सॉन्ग एक नेत्रहीन लड़की अभिनेत्री काजोल पर फिल्माया गया है.
सुनो गौर से दुनियावालों….
फिल्म ‘दस’ के इस गाने को शंकर महादेवन ने खूबसूरती के साथ गाया तो है, साथ ही सलमान खान और संजय दत्तने इस गाने को देशभक्ति के साथ ही बड़ा ही कूल बना दिया है.
रिंद पोश माल… 
‘मिशन कश्मीर’ पंद्रह अगस्त या छब्बीस जनवरी का दिन हो और फिजाएं देशभक्ति से ओत-प्रोत हों, उस पर सारी दुनिया को एक सुर में सजाने की बात हो तो इस गाने से बेहतर कुछ नहीं.
चक दे ओ चक दे इंडिया.. टाइटल सॉन्ग
फिल्म ‘चक दे इंडिया’ का ये गाना हर किसी की जुबान पर होता है. अपने देश को जहां भी प्रोत्साहन देने की बात आती है तो एक ही गाना कानों में गूंजता है और वो है ‘चक दे चक दे इंडिया’. हालांकि ये फिल्म का एक थीम सॉन्ग है, लेकिन भारत का कोई क्रिकेट मैच हो या कोई अन्य खेल ‘कुछ करिए..’ सॉन्ग तो मान लीजिए, पक्का प्ले होना ही है.
कहते हैं हमको प्यार से इंडिया वाले…
फिल्म ‘हैप्पी न्यू ईयर’ का ये गाना भी धूम मचाने वाला सॉन्ग है और देश के लिए मनाए जाने वाले हर जश्न पर प्ले किया जा सकता है.
आई लव माई इंडिया…
फिल्म ‘परदेश’ का ये गाना भी हर जश्न की शान बढ़ता है.

मंगलवार, 15 मार्च 2016

बेटी रहेगी तो उम्मीद रहेगी



भारत के सबसे समृद्ध राज्यों  पंजाब हरियाणा, दिल्ली और गुजरात में लिंगानुपात सबसे कम है। २००१ की जनगणना के अनुसार एक हजार लडक़ों पर लड़कियों की संख्या पंजाब में ७९८, हरियाणा में ८१९ और गुजरात में ८८३ है। कुछ राज्यों ने इस घटती प्रवृत्ति को गंभीरता से लिया और इसके लिए इन राज्यों की सरकारों ने महत्वपूर्ण कदम भी उठाए, जैसे गुजरात में डीकरी बचाओ अभियान चलाया जा रहा है। वहीं हरियाणा में बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओ योजना चलाई गई। पूरे भारत की बात करें, तो पिछले चार दशक से सात साल से कम आयु के बच्चों के लिंग अनुपात में लगातार गिरावट देखी जा रही है। वर्ष १९८१ में एक हजार लडक़ों पर ९६२ लड़कियां थी, वहीं वर्ष २००१ में ये अनुपात घटकर९२७ हो गया। यह इस बात का संकेत है कि हमारी आर्थिक समृद्धि और बढ़ते शिक्षा स्तर का भी इस पर कोई असर नहीं पड़ रहा  है। जिस जोर शोर और उम्मीद से बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और सेल्फी विद डॉटर मुहिम की शुरुआत की थी, उसके लिए राज्य सरकार भले ही करोड़ो रुपया खर्च कर रही हो लेकिन हरियाणा के जींद जिले से लिंगानुपात के जो नए आंकड़े आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेटियों को बढ़ावा देने के लिए बीते साल जनवरी में हरियाणा के पानीपत शहर से देशव्यापी अभियान बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ शुरू किया था, बावजूद इसके यहां के हालात में कुछ खास बदलाव नहीं हुआ है। हरियाणा के जींद जिले में लिंगानुपात तेजी से घटता जा रहा है । यहां १० गांवों में लिंगानुपात घटकर ५०० से  भी कम रह गया है। अभी तक हरियाणा सरकार अपनी पीठ यह कहकर थपथपा रही थी कि प्रदेश में लिंगानुपात बढ़ा है, जो सरकार की बड़ी उप्लब्धि है, जाहिर है इसके लिए प्रदेश सरकार ने वाहवाही लूटी और पुरस्कार भी प्राप्त किए। लेकिन सच्चाई पर गौर करें तो ये आंकड़े केवल पिछले वर्ष के दिसंबर माह के ही हैं, पूरे वर्ष का नहीं। और एक माह के आंकड़ों से किसी योजना और अभियान  को सफल नहीं बताया जा सकता है। सरकार के मुताबिक हरियाणा में ये आंकड़ा ९०३ पर पहुंचा है। पिछले वर्ष बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के शुरू होने के छह माह बाद यानी जून में ये आंकड़ा अपने निम्न स्तर यानी ८३९ पर था। इसके बाद लिंगानुपात में सुधार देखने को मिला तो ये आंकड़ा ९०३ पर पाया गया। लेकिन पूरे हरियाणा के हालात समझने के लिए हमें दोनों वर्ष की तुलना करनी होगी, ताकि ये पता लग सके कि ये महत्वाकांक्षी योजना  उतनी सफल हो पाई है जितना कि इसे दिखाया जा रहा है। 

 माना कि बेटियों की संख्या में हरियाणा के कुछ जिलों ने सराहनीय काम किया है तो कुछ जिले ऐसे भी हैं जहां यह संख्या निरंतर घटती जा रही है। पानीपत जिले से ही बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की शुरुआत हुई थी लेकिन हैरानी वाली बात है कि यहां दोनों वर्षों का यह आंकड़ा ८९२ पर ही स्थित है। वहीं इस बार लिंगानुपात में मेवात दूसरे स्थान पर है। यहां आंकड़ा ९१३ का है। यहां भी २०११ से ये आंकड़ा लगातार घट रहा है। फरीदाबाद में भी मेवात जैसे ही हालात हैं। यहां पिछले साल की  तुलना में गिरावट देखी गई है। पिछले साल यह आंकड़ा यहां८८४ था तो इस साल ८६७ है। प्रदेश का पंचकूला जिला भी मेवात  की रहा पर है। यहां भी आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले घट गया है। पिछले साल ९१६ था तो इस साल घटकर ९०७ रह गया है। सेल्फी विद डॉटर व बीबीपुर के लिए मशहूर जींद में वर्ष२०१४ में ये आंकड़ा ८९१ था तो इस साल ८५६ रह गया है। जींद से ही सटे कैथल में भी लड़कियों की संख्या पिछले साल ८८६ थी तो इस बाद घटकर ८६२ रह गई। यहां आपको बता दें कि कैथल के क्योडक गांव को खुद प्रदेश के मुख्यमंत्री ने गोद लिया हुआ है। प्रदेश में अग्रणी माना जाने वाला और मुख्यमंत्री का गृहजिला रोहतक में भी ये आंकड़ा घट रहा है। यहां भी पिछले साल जन्मानुपात ८७९ था जो कि इस बार ८५६ है।

एक अनुमान के मुताबिक भारत में पिछले दस सालों में तकरीबन डेढ़ करोड़ लड़कियों को जन्म से पूर्व ही मार डाला गया या फिर पैदा होने के छह माह बाद ही मौत के मुहं में धकेल दिया गया। दरअसल, बच्चियों को जन्म से पहले मारने की प्रथा हमारे देश में महिला और पुरुष के भेदभाव यानी गर्भ के दौरान लैंगिक जांच कराने वाली तकनीक आने के साथ ही शुरु हो गई थी। ये परीक्षण अल्ट्रासाउंड के जरिये भी किए जाते हैं। संयुक्तराष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में अवैध रूप से अनुमानित दो हजार लड़कियों  की जन्म से पूर्व हत्या की जाती है। ऐसे ही एक आंकड़े के अनुसार भारत में लगभग ३०,००० डॉक्टर्स पैसे के लालच में इस तकनीक का दुरुपयोग कर रहे हैं। कई अस्पतालों में डॉक्टर्स के केबिन में ऐसे विज्ञापन भी मिले जिन पर लिखा था कि आज पांचसौ रुपये खर्च कीजिए कल दहेज के पांच लाख बचाइए। हालांकि इस पर भारत सरकार ने आठ वर्ष पूर्व एक कानून पारित कर भ्रूण परीक्षण पर प्रतिबंध लगा दिया था लेकिन इस कानून पर अम्ल अब तक भी नहीं के बराबर ही है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि पूरे देश में २२,००० ऐसे क्लीनिक हैं, जहां इस प्रकार के परीक्षण कराए जा सकते हैं। हमारे पास ऐसे साधन नहीं हैं कि इन पर पूर्ण रूप से निगारनी रखी जा सके। लड़कियों को कोख में मारने के राह पर धीरे धीरे वे राज्य भी चल निकले जो अब तक बचे हुए थे। यहां तक कि अब श्रीनगर में भी ये स्थिति चिंताजनक हो गई। गैर सरकारी संगठन - महिला उत्थान अध्ययन केंद्र और सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च ने एक संयुक्त प्रकाशन में चेतावनी दी है कि यदि महिलाओं  की संख्या यूं ही घटती रही  तो महिलाओं के खिलाफ हिंसात्मक घटानाएं बढ़ जाएंगी। विवाह के लिए अपहरण किया जाएगा, या उसे एक से ज्यादा पुरुषों की पत्नी बनने पर मजबूर किया जाएगा। भ्रूण हत्या की  प्रथा उन क्षेत्रों में उभरी है जहां शिक्षा, खासकर महिलाओं की शिक्षा काफी उच्च दर पर हे और लोगों को आर्थिक स्तर भी सही है। ये इस बात का संकेत है कि हमारी आर्थिक समृद्धि  और शिक्षा के बढ़ते स्तर पर इस समस्या पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। ऐसे में जरूरी है कि सामाजिक जागरुकता बढ़ाने के साथ साथ प्रसव पूर्व तकनीकी जांच अधिनियम को सख्ती से लागु किए जाने की जरूरत है।
ऐसा भी नहीं कि हरियाणा में पिछले साल के मुकाबले सिर्फ लिंगानुपात गिरा ही है। यदि देखें तो  कु़छ जिलों में सुधार भी हुआ है। जिन जिलों में जन्मानुपात सुधरा है, उनमें अंबाला,भिवानी फतेहाबाद, हिसार करनाल  महेंद्रगढ़ पलवल, रेवाड़ी आदि शामिल हैं। इसके अलावा गुडग़ांव, पानीपत जैसे कुछ जिलों में स्थिति ज्यों की त्यों है।
गुडग़ांव जिले के उपायुक्त टी एल सत्यप्रकाश इस दिशा में एक बेहतर प्रयास कर रहें हैं।  बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की शुरुआत के समय से ही विजयमहाराज विद्यापीठ सोसायटी द्वारा मिलकर चलाए गए विजय रथ की शुरुआत की जो अब तक हरियाणा के १८ जिलों में जाकर लोगों के कन्या भ्रूणहत्या के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करा रहा है। इस अभियान का उद्द्ेश्य दस करोड़ लोगों के संकल्प पत्र पर हस्ताक्षर लेना व सवा अरब लोगों तक इस संदेश को पहुंचाना है कि वे कन्या भू्रण हत्या नहीं करेंगे व दूसरे लोगों को भी यह अपराध करने से रोकेंगे। अब तक इस अभियान के तहत 60 लाख लोगों द्वारा संकल्प-पत्र पर हस्ताक्षर करवाया जा चुका है। वहीं सत्यप्रकाश ने आम जनता से अपील करते हुए कहा कि वे कन्या भू्रण हत्या को रोकने के लिए आगे आएं और यदि कोई व्यक्ति कन्या भू्रण हत्या जैसा अपराध करता है तो इसकी शिकायत जिला प्रशासन को अवश्य दें, ताकि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ  कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सके।

 अब जरा कानून को भी समझ लेते हैं। १९९५ में बने जन्म पूर्व नैदानिक अधिनियम १९९५  के तहत बच्चे का जन्म पूर्व लिंग जांच कराना कानूनन जुर्म है। इसके साथ ही गर्भ का चिकित्सीय समापन अधिनियम१९७१ के अनुसार केवल विशेष परिस्थितियों में ही प्रेगनेंट महिला अबॉर्शन करा सकती है। आईपीसी की धारा ३१३,३१४,३१५ में महिला की सहमति के बिना गर्भपात कराने वाले को आजीवन कारावास की सजा का भी प्रावधान है। लेकिन महिलाएं शिक्षा और जागरुकता के अभाव में कानून के नियमों से अवगत नहीं हों पाती हैं। यानी कानून कमजोर नहीं है बल्कि कानून का पालन करने वाले व कराने वाले दोनों ही इस सड्यंत्र में शामिल हैं। जब तक समाज के बड़ तबके की सोच में बदलाव नहीं होगा इस स्थिति का बदलना संभव नहीं।

शुक्रवार, 14 अगस्त 2015

सेल्फ पॉट्रेट....

वो सांवली सी लड़की........
 मिलती है आसमां की उड़ान में सदा
 उसे कहो उतर जरा जमीं से पांव लगाए कभी।
वो चुपचाप सी लड़की.........
बोलती है, मगर एहसास को लफ्जों में पिरोकर
गाती है चमकती आंखों से, अनसुना सा गीत कोई
देखूं चेहरा अगर  पर्दा-ए-खामोशी गिराए कभी।
वो परेशान सी लड़की...........
लपेटे आती है ख्वाहिशों को जुल्फ में कैद किए
वो कांच की परीवश है कि छूते ही न चटख जाए कहीं
मचलती है कि फिर संभलती है दिल की तरह
किसी अकेली शाम में सोचती हूं उसे कॉफी पे बुला लूं।
 पूछूं हाल-ए-दिल मुझको सुनाए कभी।
 वो सांवली सी लड़की........।

शनिवार, 23 मई 2015

भलाई...................

मुझे मालूम नहीं था कि यह नो पर्किंग जोन है, बस कार पार्क की और उतरकर चल दी। कुछ देर बाद लौटी, तो एक पुलिस वाला कार पर कुहनी गढ़ाए शायद मेरे ही आने का इंतजार कर रहा था। मैं उसे देखकर थोड़ा सहमी, लेकिन सामान्य होकर गाड़ी के करीब पहुंची।
 मैडम जी गाड्डी आप ही की है के.....? , पुलिसवाले ने देहाती लहजे में पूछा .
जी हां, है तो मेरी ही, लेकिन क्या तकलीफ दे रही है?
गाड्डी 'नो पार्किंग' में खड़ी है, चालान बनेगा रॉन्ग पर्किंग का। साढ़े चारसौ रुपए भरने पडयेंगे जुर्माने के तुरंत।
मैनें अचंभित होकर कहा, क्या.......? अरे मुझे सच में नहीं पता था कि ये नो पार्किंग जोन है और यहां कौन सा बोर्ड लगा है, जिस पर ये लिखा हो कि यहां कार पार्किंग मना है?
मैड्म पढ़ी-लिखी होके भी बहस कर रही हो। इब जल्दी से जुर्माना भर दो।
पढ़ी-लिखी हूं तब ही बहस कर रही हूं, लेकिन आपको बता दूं कि मैं एक भली लड़की हूं और भले परिवार से ताल्लुक रखती हूं। खुद भी ईमानदारी से काम करती हूं और दूसरों को भी इसके लिए प्रोत्साहित करती हूं। मुझे मालूम होता, तो मैं यहां गाड़ी बिल्कुल न पार्क करती ।
पुलिसमैंन ने कहा- भले आदमी तो हम भी बहुत है और भले लोगों की हमेशा मदद किया करते हैं। ईमानदारी और भलाई के लिए अक्सर हमें ईनाम भी मिलते रहते हैं।
मुझे इस पर हंसी आई और मैनें सौ रुपए पर्स से निकाल कर कार पर रखी उसकी हथेली के नीचे सरका दिए और कहा- तभी तो महकमे को आप जैसे लोगों पर बहुत गर्व है। पुलिसमैन ने मुटठी बंद की, नोट को जेब में ठूंसा और बोला, मैड्म जी अगर दुनिया में सब आपकी तरह भले हो जाएं, तो हमें कोई शौक थोड़े ही है चालान बनाने का।  -डिम्पल सिरोही