बुधवार, 29 अगस्त 2012


1 टिप्पणी:

  1. बढ़िया। सही विश्लेषण है। हमारे तथाकथित सभ्य समाज में यह कोई नई बात नहीं है कि समस्या की जड़ खत्म कर दो और उस पर तुर्रा यह कि महिलाओं के प्रति बढ़ते दुव्र्यवहार, अपराध की जड़ें भी महिला के अस्तित्व में ही तलाशी जाती रही हैं। यह भी उसी मानसिकता का उदाहरण है, जो महिलाओं को हमेशा एक दायरे में कैद रखना चाहती है। किसी भी बहाने से सही।

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