शुक्रवार, 21 जून 2013

अनोखी दुनिया जादू की....












 क्रिस एंजिल को तो आपने टेलिविजन पर जादू दिखाते हुए देखा ही होगा और हां  हैरी पॉटर की जादुई दुनिया को भला आप कैसे भूल सकते हैं। बच्चे ही नहीं बड़े भी उस फिल्म को देखना नहीं भूलते। यही नहीं आपने स्कूल या फिल्मों में बहुत से मैजिक शो देखे होंगे, लेकिन आप जादू के बारे कम ही जानते होंगे चलिए क्यों न आज कुछ और जानकारी हासिल करें।

जादू दरअसल एक  प्रदर्शन कला है जो  हाथ की सफाई के मंचन द्वारा विशुद्ध या प्राकृतिक साधनों का प्रयोग करते हुए भ्रमजाल की रचना कर दर्शकों का मनोरंजन करती है। जो व्यक्ति इस कला का प्रदर्शन करता है वह जादुगर या ऐंद्रजालिक कहलाता है। आज जिन प्रदर्शनों को हम जादू के नाम से जानते हैं वह संपूर्ण इतिहास के दौरान किए जाते रहे हैं। 1584 में प्रकाशित रेजिनोल्ड स्कॉट की द डिस्कवरी आॅफ विचक्राफ्ट जादू टोनों की खोज पर लिखी गई पहली पुस्तक प्रकाशित की गई थी। इस किताब को 1603 में इसे जेम्स प्रथम के पदारोहण के समय जला दिया गया और बाद में इसे1651 में फिर से प्रकाशित किया गया। 1770 व 80 के दशक में यूरोप व रूस में वैज्ञानिक प्रदर्शनियों की आड़ में कभी कभी ही जादू के करतब प्रदर्शित किया जाता था।
 जादुगरों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले जादूई प्रभावों के प्रकार को प्रतिबिंति करते नामों से भी पुकारा जाता है जैसे मायावी, बाजीगर, परामनोवैज्ञानिक या बच निकलने वाला कलाकार आदि। इसके अलावा आज के जादूगरों ने कई श्रेणियों को चुनौती देना भी शुरू कर दिया है। इनमें  किसी वस्तु का निर्माण, टोपी से खरगोश निकालना, खाली बाल्टी से सिक्कों की बौछार आदि व गायब करना जिसमें जादुगर किसी वस्तु को गायब करता है। परिवर्तन, किसी वस्तु व्यक्ति को दूर भेजना या स्थान बदलना अथवा उत्तोलन जैसे प्रभाव आदि का इस्तेमाल करते हैं।

  कहां से आया जादू


आधुनिक मनोरंजन का श्रेय एक घड़ी निर्माता ज्यां यूजीन रार्बट हौदिनी को जाता है, जिन्होनें 1840 में पेरिस में एक जादू थिएटर खोला था। उसके बाद ब्रिटिश कलाकार जे एन मैस्केलीन और उसके भागीदार कुक ने 1873 में लंदन में पिकेडिली में अपना खुद का थिएटर, ईजिप्शियन हॉल स्थापित किया जहां वह मंचीय जादू कला का प्रदर्शन करते थे।  एक आम जादूगर के रूप में एक ऊंची टोपी, लंबे लहराते बालों, लंबी दाढी और लंबे कोट वाला व्यक्ति एलेकजेंडर हरमन के नाम से जादू की दुनिया में विश्वप्रसिद्ध है। हरमन एक फ्रांसीसी जादूगर थे और उनकी प्रसिद्ध का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिन्होंने उसे जादू कला काप्रदर्शन करते हएु देखा है वह मानते थे कि उनके द्वारा देखे गए सभी जादूगरों में वह महानतम थे। उसके बाद केवल हौदिनी को  प्रदर्शन व्यवसाय की अच्छी समझ थी और वह प्रदर्शन कौशल में भी महान था। स्क्रैंटन, पेनिसलवेनिया में उन्हें समर्पित एक होदिनी संग्रहालय भी है।

 मार्डन मैजिशियन


मनोरंजन के रूप में जादू आज जादू आसानी से नाटकीय स्थलों विशेषकर टेलिविजन कार्यक्रमों में परिवर्तित हो गया है, जिसमें भ्रम पैदा करने यानी जादू दिखाने के नए अवसर खुले हैं और मंचीयजादू दर्शकों की विशाल संख्या भी है। 20 सदी के प्रसिद्ध जादूगरों में ओकितो, सिकंदर,जापान के शिमाडा, हैरी ब्लैकस्टोन सीनियर जो स्टेज मैजिशियन के रूप में प्रसिद्ध थे, हैरी ब्लैकस्टोन जूनियर, हार्वड थर्स्टन, थिओडोर एनीमैन, कार्डिनी टॉमी वंडर, डौग हेनिंग शामिल थे। 20 और 21 सदी के लोकप्रिय जादूगरों में  डेविड कापरफील्ड जो जादू की दुनिया में 11 बार गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड  में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं।  लांस बर्टन, जेम्स रैंडी, पेन और टेलर, डेविड ब्लेन और क्रिस एंजिल शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर टीवी जादूगर जीवंत दर्शकों के सामने प्रदर्शन करते हैं।

जादू और धोखाधड़ी


यानी जादू का इस्तेमाल कुछ लोग अपने उद्देश्य पूर्ण करने के लिए भी करते हैं। महान जादूगर हौदिनी अपना अधिकतर समय ऐसे छली तांत्रिकों और जादूगरों द्वारा छलपूर्वक तरीकों का खुलासा करने में लगाते थे। जैम्स रैंडी और चिंतक डैरेन ब्राउन भी अपना काफी समय असामान्य रहस्यात्मक और अलौकिक घटनाओं के दावों का पता लगाने में खर्च करते थे। उदाहरण के तौर पर झाड़फंू क  करने वाले हाथ की सफाई दिखाकर मरीज के पेट से ट्यूमर निकालने का दावा करते थे, जबकि वास्तव में ट्यूमर की जगह मुर्गियों के पेट के अंगों को दिखा देते थे। हाल ही मैं लॉस एंजेल्स में भी दिसंबर 2009 में शैल गेम रिंग का भंडाफोड़ हुआ था।

 किसी को राज बताना ना


पेशेवर जादुगरों के संगठनों में सदस्यता के लिए प्राय: जादूगरों को गंभीरतापूर्वक एक शपथ ग्रहण करनी पड़ती है कि वह जादूगरों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति पर अपनी जादू कला का राज प्रकट नहीं करेंगे। कहा जाता है कि जादू के  राज को उजागर करने से जादू खत्म हो जाता है यानी यदि किसी व्यक्ति को जादू का राज बता दिया जाए तो वह इसमें रूचि नहीं लेगा और न ही इसका आनंद उठा पाएगा क्योंकि उसमें रहस्य रोमांच नहीं बचेगा। यदि व्यक्ति को यह मालूम चल जाए कि यह युक्ति इतनी आसान है तो दर्शकों  उसे महत्वहीन मानते हैं और निराश हो जाते हैं। जो भी जादूगर जादू प्रशिक्षण लेने के बाद शपथ ले लेता है वह जादू को अपना पेशा बनाने के लिए स्वतंत्र हो जाता है और उससे यह शपथ निभाने की आशा की जाती है। जादूगरों द्वारा ली जाने वाली यह शपथ कुछ इस तरह होती है।
 ''जादूगर के रूप में मैं शपथ लेता हूं कि मैं किसी भी जादूई  करतब का रहस्य जादूगरों के अलावा किसी भी अन्य व्यक्ति को तब तक नहीं बताऊंगा जब तक कि वह भी इस प्रकार की शपथ नहीं लेता, मैं किसी भी सामान्य व्यक्ति पर किसी जादू का प्रयोग तब तक नहीं करूंगा जब तक कि मैं इससे पहले इस खुद इस जादू का प्रभाव न देख लूं''।
 इस शपथ को लेने के बाद यदि कोईजादुगर किसी कारण वश इस राज को किसी अन्य को बता देता है तो दूसरे जादुगर उसे अन्य जादू नहीं सिखाना चाहते।  कुछ जादुगर इस स्थिति में आ जाते हैं कि वह अपने कुछ जादूई करतबों का राज बता देते हैं। पैन और टेलर अधिकतर इस बात का खुलासा करते हैं कि उनके जादू के पीछे का राज क्या था।

भारत में जादू

कुछ समय पहले तक कोलकाता को जादू का शहर के रूप में जाना जाता था। जादू का सामान भी यही से पूरे देश में जाता था। पी सी सरकार 50-60 के दशक में अपने प्रसिद्ध शो 'इंद्रजाल' के माध्यम से दुनिया भर में अपनी पहचान बनाने वाले एकमात्र जादूगर थे। यही कारण है कि कोलकाता व बंगाल के जादू को आज भी वर्ल्ड फेमस मैजिशियन का दर्जा प्राप्त है। अशोक भंंडारी जादू की दुनिया का जाना पहचाना नाम हैं। अपने हाथों की सफाई का कमाल दिखाकर वह जापान रूस सहित यूरोप के सभी देशों में अपने हुनर का परचम लहरा चुके हैं। महज पांच वर्ष की उम्र में उन्हें चाचा नेहरू पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया तथा 12 वर्ष की उम्र में इंदिरा गांधी और तत्कालीन प्रधानमंत्री द्वारा पुरस्कृत किया गया था। पारंपरिक भारतीय जादूगरों में राजकुमार का नाम सबसे पहले आता है। ए भारत के पहले इंडियन बास्केट एक्ट परफॉमर्र और इंडियन रोप ट्रिक शैली के रिकॉर्ड अपने नाम किए हुए हैं। गुजरात के ग्रेट लाल, मध्यप्रदेश के आनंद और उत्तरप्रदेश के ओपी शर्मा को देश के बड़े जादूगरों में गिना जाता है।

 बड़ा रहस्य है जादू का


19 शताब्दी में जादूगरों के लिए जादू सीखने के लिए कुछ ही पुस्तकें थी धीरे धीरे इनकी संख्या को बढ़Þाया गया।  इंटरनेशनल ब्रदरहुड आॅफ मैजिशिन दुनिया का सबसे बड़ा जादू से संबंधित संगठन है जिसे एक मासिक पत्रिका द लिंकिंग रिंग का प्रकाशन करती है।वहीं द सोसायटी आॅफ अमेरिकन मैजिशियंस  सबसे पुराना संगठन है। हूडिनी भी इसके सदस्य रहे तथा इसकी अध्यक्षता भी की । इंग्लैंड के लंदन में द मैजिक सर्कल हैजिसमें यूरोप का सबसे बड़ा जादू संबंधी पुस्तकालय है। इसमें सायक्रेट्स सोसायटी आॅफ मिस्ट्री एंटरटेनर्स भी है जो विशेष रूप से शोधकर्ताओं चिंतकों कहानीकारों व जादूगरों के समक्ष प्रदर्शन करता है। हॉलीवुड में मैजिक कैसल जादूई कला एकेडमी का घर है। हालांकि जादू की युक्तियों पर भी कई पुस्तकें लिखी जा चुकी हैं लेकिन ए आपको किताबों के ढेर या पुस्तकालय में नहीं मिलेंगी क्योंकि इन्हें कुछ विशिष्ट स्टोर या जादू की बुक्स रखने वाले ही खरीद सकते हैं।

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