गुरुवार, 25 जुलाई 2013

मर्दों से बेहतर होती महिला सेलिब्रिटी

 क्या उन्हें औरत होने का फायदा मिलता है या फिर वे वाकई मर्दों से बेहतर होती हैं. वजह जो भी हो, कमाई देखें, तो पता चलता है कि महिला सेलिब्रिटी पैसों के मामले में दो कदम आगे चल रही हैं.फोर्ब्स ने जो ताजा सूची जारी की है, उसमें 30 साल से कम उम्र के लोगों का जिक्र है. 10 में से सात सेलिब्रिटी महिला हैं और लेडी गागा सबसे ऊपर मौजूद हैं. 27 साल की गागा ने पिछले साल कोई आठ करोड़ डॉलर कमाए, जो किसी भी रिकॉर्ड से ज्यादा है.लेडी गागा तो इससे भी कहीं ज्यादा कमा सकती थीं लेकिन उनका कूल्हा टूट गया और उन्हें चार टूर रद्द करने पड़े. इसके बाद वह अपने 24 कैरेट सोने से जड़ी व्हील चेयर में ज्यादा नजर आईं. उनकी कमाई ने कनाडियाई पॉप स्टार 19 साल के जस्टिन बीबर को भी बौना साबित कर दिया, जिनकी कमाई कोई 5.8 करोड़ डॉलर रही. कमाई की लिहाज से 30 साल से कम वाले टॉप 10 सेलिब्रिटी-
1. लेडी गागा (8 करोड़ डॉलर)

2. जस्टिन बीबर (5.8 करोड़ डॉलर)

3. टेलर स्विफ्ट (5.5 करोड़ डॉलर)

4. कैल्विन हैरिस (4.6 करोड़ डॉलर)

5. रिहाना (4.3 करोड़ डॉलर)

6. केटी पेरी (3.9 करोड़ डॉलर)

7. अडेल (3 करोड़ डॉलर)

8. जेनिफर लॉरेंस (2.6 करोड़ डॉलर)

9. क्रिस्टेन स्टीवर्ट (2.2 करोड़ डॉलर)

10. टेलर लॉटनर (2.2 करोड़ डॉलर)

नए नए रईस....

 चीन को पैसा बनाने की मशीन कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी, लेकिन अपनी संस्कृ ति और परंपराओं को लेकर आज भी अपने पुराने ढर्रे पर चल रहा हैं। जी हां, आपको जानकर हैरानी हो रही होगी कि अपने मशीनी पॉवर और टैक्नीक का परचम लहराने वाले चीन के रईस अब सलीके भी सीखने लगे हैं।  हाल ही के दिनों में तेजी से रईस हुए चीनी हुकमारान नारंगी छीलने, कांटा और छुरी पकड़ने की तालीम हासिल कर रहे हैं। दो हफ्ते के इस कोर्स की फीस करीब नब्बे हजार रुपए है और इसमें दाखिला लने वालों की अच्छी खासी भीड़ भी। कोर्स को चलाने वाली सारा जैन के मुताबिक चीन की बड़ी आबादी दो बिल्कुल अलग पीढ़ियों के बीच फंस गई है, क्योंकि उनके बच्चे एक उन्मुक्त समाज में जी रहे हैं जिसके चलते उन्हें एक साथ कई जिम्मेदारियां निभानी पड़ रही हैं। सारा की मानें तो यहां आने वाले  50 प्रतिशत संख्या ऐसे लोगों की है, जो कोर्स की फीस का तीन गुना कीमत देने की हैसियत रखते हैं। यही नहीं, यहां आने वाले लोगों में 400 से भी ज्यादा संख्या हाई सोसाइटी लेडीज की है, जो कपड़े पहनने के शऊर से लेकर गोल्फ, राईडिंग जैसे खास खेलों की जानकारी लेती हैं, प्रसिद्ध वाइनों के बारे में जानती हैं और चाय परोसने व टेबल सजाने के तरीके सीख रही हैं। चीन में हाई सोसाइटी की अधिकतर महिलाएं किसी बड़ी शादी में जाने पर सिर्फ इसलिए खाना नहीं खाती क्योंकि, उन्हें यह नहीं मालूम कि वैस्टर्न कल्चर के मुताबिक कैसे खाया जाता है यानी कैसे छुरी और कांटे का इस्तेमाल होता है। यही, नहीं यहां आने वाले ऐसे पुरुष भी हैं, जिन्हें यह सिखाया जाता है कि किसी से पहली ही मुलाकात में ही यह नहीं पूछना चाहएि कि तुम कितना कमाते हो या फिर तुमने अपनी पत्नी से तलाक क्यों ले लिया। इस कोर्स की प्रशिक्षक जोसलिन वांग का कहना है कि किसी भी बड़े अधिकारी या सेलिब्रिटी के लिए उसके खाने व छुरी व कांटे को पकड़ने का तरीका उसकी शख्शियत बताने के लिए बड़ा रोल अदा करता है। यानी कहा जाए कि चीन के लोग नए नए रईस हुए हैं इसलिए रईसों के तौरतरीके भी अपनाने ही पड़ेंगे और पुरानी व नई पीढ़ी के फासले को खत्म करने के लिए यह भी जरूर ही है।

शनिवार, 6 जुलाई 2013

अदली मंसूर के सिर पर कांटों का ताज .............

मिस्र  के मुख्य न्यायाधीश अदली मंसूर ने नहीं सोचा होगा कि हालात ऐसे हो जाएंगे कि उन्हें मिस्र के अंतरिम राष्ट्रपति की शपथ लेनी पड़ेगी। हकीकत यह है कि वह अब ऐसे मुल्क के शासक बन गए हैं, जो उथल-पथल के दौर से गुजर रहा है और जिसे स्थायित्व की जरूरत है। ऐसे में मंसूर के लिए राष्ट्रपति का ताज कांटों भरा है और राह मुश्किल। मंसूर की नियुक्ति वर्ष 2011 में तैयार हुए कानून के तहत हुई है, जो अदालत को स्वतंत्रता प्रदान करता है तथा राष्ट्रपति की शक्तियां कम करता है।
23 दिसंबर 1945 को काहिरा में जन्मे अदली  मंसूर का पूरा नाम अदली महमूद मंसूर है। मंसूर एक पुत्र व दो पुत्रियों के पिता हैं। उन्होंने वर्ष 1967 में काहिरा यूनिवर्सिटी स्कूल आॅफ लॉ से स्नातक की डिग्री हासिल की तथा वर्ष 1969 में कानून में परास्नातक डिग्री प्राप्त की थी। यही नहीं, उन्होंने अर्थशास्त्र की शिक्षा के साथ मैनेजमेंट साइंस में भी 1970 में पोस्टग्रेजुएट डिग्री हासिल की है। वर्ष 1984 में वह मिस्र की राज्य परिषद के चांसलर के रूप में कार्यरत रहे। वर्ष 1992 तक एससीसी यानी सुप्रीम कांस्टीट्यूशनल कोर्ट के उप प्रमुख के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
माना जा रहा है कि मिस्री सेना प्रमुख अलसीसी के हाथों में ही सत्ता रहेगी। उन्होंने पिछले ही वर्ष हुसैन तंतावी की जगह रक्षा मंत्री पद का स्थान ग्रहण किया है। अल सीसी रोज नमाज करने वाले मुसलमान जरूर हैं, लेकिन वह सेक्युलरइज्म में यकीन रखते हैं। आज मिस्र की जनता की भी यही ख्वाहिश है कि मिस्र पर वही व्यक्ति शासन करे, जो कट्टरपंथी न हो। जाहिर है कि इस मामले में अदली मंसूर के रूप में सेना प्रमुख का चुनाव सही है। इस मुश्किल वक्त में मुर्सी की नाकामी के बाद मिस्र की जनता ने फिर से सेना पर भरोसा किया है। अल सीसी के जनरल जनता का भरोसा जीतने में तो कामयाब हो गए हैं, लेकिन उनकी उम्मीदों पर कितने खरे उतरते हैं, यह देखने वाली बात होगी।
अल सीसी के साथ ही अंतरिम राष्ट्रपति अदली मंसूर पर पहली सबसे बड़ी जिम्मेदारी तो यही है कि वह जल्दी ही नए राष्ट्रपति के लिए शांतिपूर्वक चुनाव कराएं। दूसरे यह कि मिस्र को आर्थिक मोर्चे पर मजबूती प्रदान करें। तीसरी यह कि मुसलिम ब्रदरहुड को हिंसक प्रतिक्रिया करने से बाज रखें। हालांकि अल सिसी ने वादा किया है कि सेना राजनीति से जाहिर तौर पर दूर रहेगी, लेकिन वह अदली मंसूर को कठपुतली नहीं बनाएगी, यह देखने वाली बात होगी। मुर्सी का तैयार किया हुआ इसलामी संविधान निलंबित किया जा चुका है। अदली मंसूर को बहुत सावधानी के साथ कदम बढ़ाने होंगे। मिस्र की जनता को तहरीर चौक पर जमा होने में देर नहीं लगती।